‘अब तो शर्म करो साहेब... !’
कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है गुजरात पुलिस को जो पांचवी बार रिमांड बढाने के लिए कोर्ट के आगे पहुँची थी| साथ ही कहा कि क्या जब तक कोर्ट नामंजूर न करें आप रिमांड मांगते रहोगे ?
देश-विदेश में करोड़ों भक्तों द्वारा पूजित व समाज के सभी वर्गों द्वारा सम्मानित संत श्री नारायण प्रेम साईं जी की अब तक कुल २३ दिन से अधिक की अत्याचारपूर्ण रिमांड लेने के बाद भी पुलिस का पेट नहीं भरा व फिर से ४ दिन के रिमांड की भीख मांगने निर्लज्ज होकर कोर्ट के द्वार पहुँच गए| इससे गुजरात पुलिस की प्रमाणिकता पर फिर से सवाल उठाये जा रहें है जिनमे से कुछ इस प्रकार है :-
1) क्या वे भूल गए जिनकी रिमांड ली जा रही हैं वे कोई शातिर अपराधी या आतंकवादी नहीं बल्कि वर्षों से सेवाकार्यों में रत लोक-वन्दनीय संत हैं?
2) रिकॉर्ड तोड़ रिमांड के बाद भी गुजरात पुलिस अपना काम पूरा क्यों नहीं कर पा रहीं? क्यों वह स्वीकार नहीं करती की सारे आरोप झूठे व बेबुनियाद निकले हैं और दिन-रात कई टीमें व एजेंसियों को लगाकर की कड़ी जाँच के बाद भी उनके हाथ कोई अधिकारिक सबूत, गवाह या प्रमाण नहीं मिला जिससे आरोपों की पुष्टि हो सकें ?
3) क्या गुजरात पुलिस ने यह तैर कर रखा है कि जब तक झूठें आरोपों को सच साबित नहीं करती, रिमांड मांगती रहेगी?
गौर से नजर डाले तो इस पूरे प्रकरण में गुजरात पुलिस की सारी कार्यप्रणाली बेहद संदेहजनक, संवेदनहीन व पक्षपाती रही हैं |
निर्दोष साधकों पर अत्याचार लेकर उनकी अवैध गिरफ्तारी, महिला साध्वियों और साधिकाओं की अस्मिता व अधिकारों का हनन, गैर-कानूनी रिमांड, रिमांड के वक्त मानवीय अधिकारों का हनन, असंवैधानिक अरेस्ट वारंट, बिना सर्च वारंट के छापे, कायदे व कानून के प्रति अत्यंत लापरवाही, न्यायपालिका के समक्ष भी बिना दस्तावेजों के खड़े रहने जैसा गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव सारे गंभीर अपराध हैं | और वे भी पुलिस जैसे तथाकथित समाज रक्षकों के लिए अत्यंत अशोभनीय व अभिशाप रूप हैं| सत्य व न्याय की रक्षा जिनकी जिम्मेदारी है उन्हें के द्वारा उसका गला घोंटा जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व चिंताजनक है |
हमारी विनम्र प्रार्थना है कि पुलिस की ऐसी संशयास्पद व असामाजिक कार्यप्रणाली की जाँच होनी चाहिए व दोषी अधिकारीयों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आइन्दा से किसी भी नागरिक के मानवीय अधिकारों का हनन ना हो....षड्यंत्र व भ्रष्टाचार की सूली पर किसी भी निर्दोष की बलि न चढ़ा दी जाय..... और कर्तव्य की बलि चढाने वाले बिके हुए सरकारी टट्टुओं के अत्न्याय-अत्याचार का कोई भी शिकार न बनें |
कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है गुजरात पुलिस को जो पांचवी बार रिमांड बढाने के लिए कोर्ट के आगे पहुँची थी| साथ ही कहा कि क्या जब तक कोर्ट नामंजूर न करें आप रिमांड मांगते रहोगे ?
देश-विदेश में करोड़ों भक्तों द्वारा पूजित व समाज के सभी वर्गों द्वारा सम्मानित संत श्री नारायण प्रेम साईं जी की अब तक कुल २३ दिन से अधिक की अत्याचारपूर्ण रिमांड लेने के बाद भी पुलिस का पेट नहीं भरा व फिर से ४ दिन के रिमांड की भीख मांगने निर्लज्ज होकर कोर्ट के द्वार पहुँच गए| इससे गुजरात पुलिस की प्रमाणिकता पर फिर से सवाल उठाये जा रहें है जिनमे से कुछ इस प्रकार है :-
1) क्या वे भूल गए जिनकी रिमांड ली जा रही हैं वे कोई शातिर अपराधी या आतंकवादी नहीं बल्कि वर्षों से सेवाकार्यों में रत लोक-वन्दनीय संत हैं?
2) रिकॉर्ड तोड़ रिमांड के बाद भी गुजरात पुलिस अपना काम पूरा क्यों नहीं कर पा रहीं? क्यों वह स्वीकार नहीं करती की सारे आरोप झूठे व बेबुनियाद निकले हैं और दिन-रात कई टीमें व एजेंसियों को लगाकर की कड़ी जाँच के बाद भी उनके हाथ कोई अधिकारिक सबूत, गवाह या प्रमाण नहीं मिला जिससे आरोपों की पुष्टि हो सकें ?
3) क्या गुजरात पुलिस ने यह तैर कर रखा है कि जब तक झूठें आरोपों को सच साबित नहीं करती, रिमांड मांगती रहेगी?
गौर से नजर डाले तो इस पूरे प्रकरण में गुजरात पुलिस की सारी कार्यप्रणाली बेहद संदेहजनक, संवेदनहीन व पक्षपाती रही हैं |
निर्दोष साधकों पर अत्याचार लेकर उनकी अवैध गिरफ्तारी, महिला साध्वियों और साधिकाओं की अस्मिता व अधिकारों का हनन, गैर-कानूनी रिमांड, रिमांड के वक्त मानवीय अधिकारों का हनन, असंवैधानिक अरेस्ट वारंट, बिना सर्च वारंट के छापे, कायदे व कानून के प्रति अत्यंत लापरवाही, न्यायपालिका के समक्ष भी बिना दस्तावेजों के खड़े रहने जैसा गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव सारे गंभीर अपराध हैं | और वे भी पुलिस जैसे तथाकथित समाज रक्षकों के लिए अत्यंत अशोभनीय व अभिशाप रूप हैं| सत्य व न्याय की रक्षा जिनकी जिम्मेदारी है उन्हें के द्वारा उसका गला घोंटा जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व चिंताजनक है |
हमारी विनम्र प्रार्थना है कि पुलिस की ऐसी संशयास्पद व असामाजिक कार्यप्रणाली की जाँच होनी चाहिए व दोषी अधिकारीयों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आइन्दा से किसी भी नागरिक के मानवीय अधिकारों का हनन ना हो....षड्यंत्र व भ्रष्टाचार की सूली पर किसी भी निर्दोष की बलि न चढ़ा दी जाय..... और कर्तव्य की बलि चढाने वाले बिके हुए सरकारी टट्टुओं के अत्न्याय-अत्याचार का कोई भी शिकार न बनें |

No comments:
Post a Comment